अपने बारे में चाहे कुछ भी कह लूँ, बात घूम फिर के घुमक्कड़पने पर आ जाती है। घूमना, जिसे परिष्कृत भाषा में यात्रा या पर्यटन कहते हैं, मेरे जीवन के हर अध्याय का हिस्सा रहा है। भारत के जाने अनजाने शहरों, कस्बों और बाद में महानगरों में रहने का अवसर मेरी सबसे अमूल्य निधि है। कुछ अनुभव जुड़े हैं अब तक, जिनसे कहानियां, कविताएं और ख्याल उपजे हैं। इसी जमा पूँजी का सिलसिला है यह ब्लॉग। पढ़ने के लिए आपका शुक्रिया।

I love being around children and you will often find me in the company of books, music, nature and art. Hailing from the Hindi heartland, I revere Hindi language and literature.

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