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विकल्प

तय नहीं कर पाते हम

कि ज़िंदगी को कैसे जिया जाए

दौड़ते रहें रेसकोर्स में घोड़ों की मानिंद

रेंगते चलें कछुए की चाल धीमे धीमे या

चुपके से खरगोश बन एक मीठी नींद सो ही लें।

तेज़ रफ़्तार के जहाज में हों सवार या

रेल की खिड़की से पेड़ गिनें

चाहे रास्ता पकड़ें कोई भी

कुछ न कुछ तो पीछे छूट ही गया

चाँद को पा लिया मगर

अफसोस सितारों का हाथ छूट गया।

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Image: Unsplash)

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