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इमारतें

ये ऊँची इमारतें

इनके नीचे दफन है

कुछ पेड़,

कुछ पंछियों के नीड़

शायद कोई संकरी गली

छप्परों से ढकी

जो झुग्गियों में तब्दील हुई

कोई बहती नदी

जो धीरे धीरे नाले में बदल गयी

यहां बरगद तले बैठते थे

हुक्का फूंकते वृद्ध

जिनके बेटे शहरों को विदा हुए

और ऐसी इमारतों में ईंटें जोड़ते

किसी अधबने कमरे में सो गए

या किसी दीवार में दफ्न हो गए।

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(Image: Unsplash)

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