Kavita

बोझ

दिल पर इतना बोझ न रखो,

सिमटी इतनी सोच न रखो

ले उधार शब्द थोड़े से

दिल को जी भर कुछ कहने दोI

जोड़ तोड़ दुनियादारी में,

बेचारे मन को न कसोI

दो लम्हा मन की भी सुन लो,

पन्नों पर इसको बहने दोI

आंखों का तम छंट जाएगा

किरणों से कोमलता की,

न हो जाये पत्थर, इससे

पहले कुछ कह लेने दोI

कुछ अपनी भी कह लो तुम

कुछ औरों की सुन लेने दो

दिल पर इतना बोझ न रखो

सपने कुछ बुन लेने दो।

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(Image: Unsplash)

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